Tue. Mar 5th, 2024

अध्यात्मिक का नाम – मोहित जी

स्थान – मुम्बई

प्रश्न 5- मोहित जी मुम्बई से राधा बल्लभ श्री हरिवंश महाराज जी । महाराज जी इनके पिता जी अत्यधिक तामसिक, जिद्दी प्रकार के व्यक्ति हैं। पीछे इनका एक्सीडेंट होने के कारण पहले से ज्यादा जिद्दी और तामसिक प्रवृत्ति के हो गये हैं। गाली देने लगे हैं। यह सब देखकर इनको क्रोध आ जाता है जिस कारण ये क्रोध मे उनको खरी खोटी सुना देते है, फिर पश्चाताप होता है कि इस कारण मेरी भक्ती का नाश हो रहा है। ऐसे मे इनका क्या कर्तव्य है?

उत्तर – हाँ, ऐसे में इनका यह कर्तव्य है कि अपने पिता जी को प्रभु की तरह मानो । वो जैसे भी बर्ताव करें वो आपको नही देखना, आपका क्या कर्तव्य है ये आपको देखना है। जैसे आप चरण दबा रहे हो और वो आपको गाली दे रहे हो उस पर आप ध्यान न दे बस अन्दर से धैर्यवान बने रहिए। उनके कटुवचन पर आप प्रभावित मत होइए। ये आपकी परिक्षा का समय है। इस समय आप सेवा कर लिए उनकी, तो किसी यज्ञ से कम नहीं है । माता – पिता प्रभु के समान हैं। हाँ ये उनका रूद्र व्यवहार है, प्रतिकुल व्यवहार है। यदि आपने ये सब सहन कर लिया तो जो ईश्वरीय शक्ति आपको देख रही है वो आपको निहाल कर देगी । आपको जो सेवा करनी है अपने कर्तव्य को देखकर  करनी है, उनके कर्तव्य को देखकर नहीं। गुरू पद पंकज सेवा तीसरी भक्ति अमान ।। मान रहित होकर सेवा करना । अब हम क्या करते हैं सेवा तो करते हैं पर कर्तव्य उनका देखते हैं। वो क्या कर रहे हैं उसको मत देखो। हमारा क्या कर्तव्य है उनके प्रति उसको देखो। बढ़िया अवसर आया है उनकी सेवा करो ।

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